लोक अदालत में लंबित मामले का निष्पादन होने पर, पहले से भुगतान किये गये अदालती शुल्क होता है वापस

बस्ती :- एक मुटठी आसमां, थीम, गरीबो तथा समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गो के लिए भरोसा, दृढ निश्चय तथा आशा का प्रतीक है। विधिक सेवा प्राधिकरणों का गठन समाज के कमजोर वर्गो को मुफ्त एवं सक्षम विधिक सेवाओं को प्रदान करने के लिए, ताकि आर्थिक या किसी भी अन्य कारणों से कोई भी नागरिक न्याय पाने से वंचित न रहें तथा लोक अदालत का आयोजन करने के लिए किया गया है, जिससे कि न्यायिक प्रणाली समान अवसर के आधार पर सबके लिये न्याय सुगम बना सकें। उक्त जानकारी प्रभारी सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने दी है।
उन्होने बताया कि लोक अदालत कानूनी विवादों का, सुलह की भावना से, न्यायालय से बाहर समाधान करने का वैकल्पिक विवाद निष्पादन का अभिनव तथा सर्वाधिक लोकप्रिय माध्यम है, जहॉ आपकी समझ-बूझ से विवादों का समाधान किया जाता है। लोक अदालत सरल एवं अनौपचारिक प्रक्रिया को अपनाती है तथा विवादों का अविलम्ब निपटारा करती है। इसमें पक्षकारों को कोई शुल्क भी नही लगता है। लोक अदालत से न्यायालय में लंबित मामले का निष्पादन होने पर, पहले से भुगतान किये गये अदालती शुल्क को भी वापस कर दिया जाता है।
उन्होने बताया कि लोक अदालत का आदेश/फैसला अंतिम होता है, जिसके खिलाफ अपील नही की जा सकती। लोक अदालत से मामले के निपटारे के बाद दोनों पक्ष विजेता रहते है तथा उनमें निर्णय से पूर्ण संतुष्टि की भावना रहती है, इसमें कोई भी पक्ष जीतता या हारता नही है। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण ने जन-जन के दर तक न्याय की इस तीव्रतर प्रणाली को पहुॅचाया है और अदालतो का बोझ बड़े पैमाने पर घटाया है। 2021 में आयोजित की गयी राष्ट्रीय लोक अदालतों में, एक करोड़ पचीस लाख से ज्यादा मामलों का निपटारा किया गया है।
झांकी का अग्रभाग ‘न्याय सबके लिए‘ को बिम्बित करता है, जो कि भयमुक्तता, भरोसा तथा सुरक्षा का द्योतक है। झांकी के पृष्ठ भाग में, एक हाथ की पॉचों उॅगलियॉ खुलती हुई दिखाई पड़ती है, जो लोक अदालतों के पांच मार्ग दर्शक सिधान्तों को दर्शाती है-सब के लिए सुगम्यता, निश्चयात्मकता, सुलभता, न्यायसंगतता तथा शीघ्र न्याय।

