Saturday, August 30, 2025
जय हो जानता कीबस्ती

मूलभूत सुविधाओं और अधिकारों के लिए जूझ रहा गांव जिगीनिया

जो काम 1500 सफाई कर्मचारी करवाता है सरकार उसके लिए 20000 क्यों देती है ?

अव्यवस्था और उपेक्षा का शिकार है खरवानिया ग्राम सभा का जिगनिया गांव 

पंचायत भवन बना प्रधान के लिए मात्र धन निकासी का जरिया

बदहाल सड़को की वजह से आज भी नही जा सकता बारिश में एंबुलेंस

सफाई कर्मी साहब कभी कभी आते है वो भी वेतन देने 

बस्ती (संवाददाता बनकटी ,रोहित) । एक तरफ योगी सरकार स्वक्षता पखवाड़ा चला कर विकास के दंभ भर रही है वही दूसरी तरफ जिम्मेदार सरकार के साथ जनता की उम्मीदों पर झाड़ू चलाने से बाज नहीं आ रहे ।

मामला बनकटी विकास खंड के ग्राम पंचायत खरवानिया के राजस्व ग्राम जिगिनिया का है। मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे इस गांव में ना सड़क है न नाली। एक अदद सड़क ही इस गांव के लोगो की मांग है ।गांव वाले बताते है की गांव में आने जाने का रास्ता नही है जिसकी वजह से बारिश में इमरजेंसी होने पर मरीजों को खाट पर लाद के ले जाना पड़ता है क्योंकि गांव में एंबुलेंस नही पहुंच पाता। अव्यवस्था और उपेक्षा का शिकार जिगिनिया गांव के लोगो की प्रशासन को लेकर असंतोष व्याप्त है।

गांव वालो को पंचायत सहायक का पता ही नही !!

गांव वालो का कहना है कि गांव में कभी जिम्मेदार लोग आते ही नही,महीना गुजर जाता है लेकिन पंचायत भवन नही खुलता इसलिए कोई कागज बनवाने के लिए ब्लॉक तक जाना पड़ता है।पंचायत भवन तो बस धन निकासी का जरिया बनके रह गया है। पंचायत सहायक के बारे में किसी को कुछ पता ही नही।

1500 के काम के लिए सरकार देती है 20000 ?

गांव में साफसफाई का आलम तो यह है की सफाई कर्मचारी साहब आते तो है लेकिन कभी कभार और वो भी वेतन देने। साहब ने सफाई का कार्य करने के लिए एक महिला को नियुक्त कर रखा है जिसका काम है पंचायत भवन पर झाड़ू लगाना। इसके लिए उसे 1500 महीना मिलता है। गांव में साफसफाई का काम देखने वाली विमला देवी पत्नी गंगाराम ने बताया कि हमको 1500रूपया पर महीने सफाई कर्मी बाबू अशोक यादव देते।

अब जो काम मात्र 1500 रुपए देकर हो जाता है सरकार उसके लिए 20000 रुपए क्यों देती है ? एक तरफ एक महिला है जो सफाई का काम मात्र 1500 में कर रही है वही दूसरी तरफ सफाई कर्मचारी बाबू है जिनको बिना काम किए 20 हजार महीना मिलता है। साहब एक बार या फिर जरूरत पड़ने पर क्रीच टाइट कर के आते है 1500 देते है चले जाते है।

बड़ा प्रश्न तो ये उठता है की साहब की उपस्थिति कौन लगता है?क्या प्रधान को भी कुछ मिलता है? जब सफाई नही होती तो सफाई पर आने वाला बजट कहा जाता है?

बिना प्रधान के मिलीभगत के ये काम कैसे हो सकता है।

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