Sunday, August 31, 2025
बस्ती

मूल्य-आधारित और समावेशी शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण- डॉ सौरभ मालवीय

मूल्य-आधारित और समावेशी शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण- डॉ सौरभ मालवीय

संस्कार युक्त शिक्षा, प्रचार प्रसार विद्या भारती का लक्ष्य – हेमचन्द्र

बस्ती। विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान आज देश के सबसे बड़े शैक्षणिक आंदोलनों में से एक है, जो गुणवत्तापूर्ण (गुणात्मक) और संस्कृति-युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्या भारती मूल्य-आधारित और समावेशी शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण में रत है। विद्या भारती का मूल उद्देश्य भारतीय संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रीयता आधारित शिक्षा प्रणाली का प्रचार प्रसार करना है।

1952 में गोरखपुर में एक विद्यालय से प्रारंभ कर यह संस्था आज 684 जिलों में 12,118 विद्यालयों का संचालन कर रही है। उपरोक्त बातें डॉ सौरभ मालवीय, क्षेत्रीय मंत्री पूर्व उत्तर प्रदेश क्षेत्र ने सरस्वती विद्या मन्दिर रामबाग बस्ती में विद्या भारती गोरक्ष प्रान्त के प्रचार विभाग की एक दिवसीय कार्यशाला के दौरान आयोजित पत्रकार वार्ता में कहीं।

डॉ मालवीय ने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय देश के अनेक दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित हैं, इनमें जनजातीय इलाके और सीमावर्ती जिले शामिल हैं। भारत की सीमाएँ पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, चीन और म्यांमार से लगती हैं, और इन 127 सीमावर्ती जिलों के 167 विकास खण्डों में विद्या भारती ने 211 विद्यालय स्थापित किए हैं। इसके अतिरिक्त, संस्था देशभर में 8,000 से अधिक अनौपचारिक शिक्षा केन्द्र भी संचालित कर रही है, जो समाज के वंचित वर्ग को नि:शुल्क शिक्षा सुविधा प्रदान कर रहे हैं। वर्तमान में 35.33 लाख से अधिक छात्र- छात्राएं विद्या भारती के स्कूलों में अध्ययनरत हैं और उन्हें 1.53 लाख से अधिक शिक्षक शिक्षित कर रहे हैं।

कार्यशाला के समापन सत्र में क्षेत्रीय संगठन मंत्री हेमचन्द्र जी ने कहा कि यदि हम विद्या भारती जैसे संगठनों की बात करें तो प्रचार विभाग विद्यालयों में हो रहे सांस्कृतिक, शैक्षिक और सामाजिक कार्यों को समाज के सामने लाता है। इससे समाज को प्रेरणा मिलती है और विद्यार्थी, शिक्षक तथा अभिभावक सभी को गर्व की अनुभूति होती है।

इससे पूर्व प्रान्त की दोनों समितियों की एक दिवसीय प्रान्तीय कार्यशाला का उद्घाटन हेमचन्द्र जी (क्षेत्रीय संगठन मंत्री, विद्या भारती पूर्वी उ०प्र०) डॉ० सौरभ मालवीय (क्षेत्रीय मंत्री, विद्या भारती पूर्वी उ०प्र०) के द्वारा दीप प्रज्ज्वलन व पुष्पार्चन के साथ किया गया। द्वितीय सत्र में प्रो. किरणलता डंगवाल जी के द्वारा ए० आई० के प्रयोग के संदर्भ में प्रशिक्षण प्रदान किया गया। तृतीय सत्र में संगठनात्मक रचना एवं अष्ट बिन्दु पर डॉ० योगेन्द्र प्रताप सिंह, क्षेत्र संयोजक, प्रचार विभाग) ने एवं अंकित गुप्ता (प्रान्त संयोजक, प्रचार विभाग) ने कार्य योजना के महत्व को रेखांकित किया।

सत्र को हेमचन्द्र जी ने संबोधित किया। अतिथि परिचय प्रधानाचार्य गोविन्द सिंह जी ने कराया। इस अवसर पर प्रान्त की दोनों समितियों के मंत्री डॉ० शैलेश कुमार सिंह व डॉ दुर्गा प्रसाद अस्थाना, प्रदेश निरीक्षक राम सिंह व जियालाल, प्रधानाचार्य सरस्वती शिशु मन्दिर भानु प्रकाश मिश्र, प्रधानाचार्य बालिका विद्या मन्दिर प्रियंका सिंह, प्रान्त संवाददाता प्रेमशरण मिश्र व सोशल मीडिया प्रमुख नरेन्द्र चन्द कौशिक, अशोक मिश्र, डॉ उपेन्द्र नाथ द्विवेदी, लव कुमार, रमेश सिंह, योगेश कुमार, शम्भू नारायण कुशवाहा, चन्द्रप्रकाश सिंह, सहित सभी संकुलों के प्रचार, सोशल मीडया व संवाददाता प्रमुख उपस्थित रहे।

गोरक्ष प्रान्त विद्यालय 235 छात्र संख्या 7,7211,आचार्य 2,600, संस्कार केन्द्र 260, संस्कार केन्द्र छात्र संख्या 7,600

विद्या भारती गोरक्ष प्रान्त के विभिन्न विद्यालयों के पूर्व छात्र प्रशासनिक अधिकारी, चिकित्सक, वैज्ञानिक, अभियंता, आई.टी. क्षेत्र, व्यवसायी, अधिवक्ता, शिक्षक आदि के दायित्व में समाज के विभिन्न क्षेत्र में अपना योगदान दे रहे हैं।

विद्या भारती के पूर्व छात्रों का नेटवर्क इसकी दीर्घकालिक शैक्षिक दृष्टि का सशक्त प्रमाण है 10 लाख 30 हजार से अधिक पूर्व छात्र इसके पोर्टल पर पंजीकृत हैं, जिससे यह विश्व का सबसे बड़ा पूर्व छात्र संगठन बन गया है। यह पूर्व छात्र 87 से अधिक देशों में रहकर विविध क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं और अपनी स्कूली शिक्षा के दौरान प्राप्त सेवा संस्कृति और प्रतिबद्धता के मूल्यों को आगे बढ़ा रहे हैं। विद्या भारती का संकल्प है सभी तक शिक्षा पहुंचे विशेष कर जनजातीय क्षेत्र सीमावर्ती जिलों और शहरी सेवा बस्तियों में रहने वाले बच्चों के लिए सस्ती और सुलभ शिक्षा की व्यवस्था हो। संस्था शिक्षा को केवल शैक्षणिक प्रक्रिया ना मानते हुए उसे राष्ट्र जागरण का मिशन मानती है। “सा विद्या या विमुक्तये” के दर्शन आधारित सोच के साथ, विद्या भारती एक संस्कार युक्त, शैक्षिक रूप से मजबूत और समावेशी शिक्षा प्रदान करती है, जिसका उद्देश्य एक आत्मनिर्भर और मूल्यनिष्ठ पीढ़ी का निर्माण करना है।

मूल्य, दृष्टिकोण और प्रौद्योगिकी का समन्वय

विद्या भारती की विशेषता इसकी मूल्य आधारित शिक्षा को आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण से जोड़ने में है। तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में, संस्था यह सुनिश्चित करती है कि नैतिकता और चरित्र निर्माण को प्राथमिकता देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल उपकरणों का उपयोग जिम्मेदारी के साथ हो। हमारे विद्यालयों में AI सक्षम लर्निंग प्लेटफॉर्म, डिजिटल क्लासरूम अपनाए जा रहे हैं और यह सब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) के अनुरूप है। वर्तमान में 507 से अधिक विद्यालयों में अटल टिंकरिंग लैब्स की स्थापना की जा चुकी है, जो AI, रोबोट कोडिंग और अन्य उभरती तकनीकों में बच्चों को हाथों -हाथ सीखने का अवसर देती हैं। वैश्विक STEM मानकों की दिशा में कार्य करते हुए भी संस्था का नैतिक मानदंड भारतीय दर्शन द्वारा निर्धारित होता है। योग, संस्कृत, सांस्कृतिक, प्रशिक्षण और मूल्य शिक्षा का समावेश छात्रों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी, जड़ों से जुड़ाव और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाने के लिए तैयार करता है।

संस्कार शिक्षा और कौशल: विद्या भारती का मार्ग

औपचारिक शिक्षा के साथ विद्या भारती अनेक अनौपचारिक विद्यालयों का संचालन भी करती है जिससे बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित किया जा सके। देशभर में लगभग 10,000 शिशु वाटिकाएँ 3 से 6 वर्ष के बच्चों को प्रारंभिक बाल शिक्षा प्रदान कर रही हैं। ये शिक्षण भारतीय पद्धतियों पर आधारित होती हैं- जैसे खेल, कहानियाँ, हस्तकला और संस्कारक्षम कार्यक्रम। यह एक तनाव- मुक्त शिक्षण पद्धति है जिसमें बस्ता, परीक्षा और गृहकार्य नहीं होते, जिसे NEP 2020 द्वारा भी मान्यता मिली है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि विद्या भारती उपनिषद में लिखित पंचकोश एवं पंचपदी शिक्षा पद्धति को अपनाते हुए सफलतापूर्वक शैक्षणिक कार्य संचालन कर रही है।

हमारे आईटीआई, जन शिक्षण संस्थान और स्किल हब जैसे व्यवसायिक शिक्षा के केन्द्र जनजातीय और ग्रामीण युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान करते हैं। कारगिल (लद्दाख), शिमला और मंडी (हिमाचल प्रदेश) और किफिरे (नागालैंड) जैसे दुर्गम क्षेत्रों में इन केन्द्रों की स्थापना की गई है।

साथ ही विद्या भारती सैनिक विद्यालय, सीमा क्षेत्र विद्यालय और आवासीय जनजातीय विद्यालय भी संचालित करती है ताकि कोई भी क्षेत्र शिक्षा से वंचित न रह जाए। भारतीय शिक्षा शोध संस्थान (लखनऊ) और समर्थ भारत अनुसंधान केन्द्र (गांधीधाम गुजरात) जैसे संस्थान भारतीय ज्ञान परंपराओं पर आधारित पाठ्यक्रम एवं अनुसंधान पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, जबकि मानक परिषद (भोपाल) पूरे देश में स्कूलों की गुणवत्ता के मानकीकरण एवं उन्नयन का कार्य कर रही है।

शैक्षणिक परिणाम : उत्कृष्ट का प्रमाण

2024-25 के शैक्षणिक सत्र के बोर्ड परीक्षा परिणाम विद्या भारती की अकादमिक उत्कृष्ट को दर्शाते हैं। कक्षा 12वीं में 93% से अधिक छात्रों ने सफलता प्राप्त की, जिन में 2,500 से अधिक छात्रों ने 90% से अधिक अंक प्राप्त किये। कक्षा 10वीं में 96.5% छात्रों ने सफलता पाई, जिनमें 27,000 से अधिक छात्रों ने 90% या उससे अधिक अंक अर्जित किये। यह सफलता शिक्षकों की मेहनत मूल्य आधारित अनुशासन और NEP निर्देशित पद्धतियों का परिणाम है। देश भर में 328 विद्यालय सी.बी.एस.ई से सम्बद्ध हैं। जबकि शेष राज्य बोर्डों के अंतर्गत उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। उत्तराखंड, उड़ीसा और पंजाब प्रान्त में प्रथम, द्वितीय, तृतीय स्थान पर रहने वाले एवं हिमाचल प्रदेश पश्चिम बंगाल, झारखंड, मध्य प्रदेश, असम आदि प्रान्तों में राज्य शिक्षा बोर्ड की प्रावीण्य सूची में प्रथम 10 स्थानों में आकर विद्यार्थियों ने कीर्तिमान स्थापित किया है। राष्ट्रीय विज्ञान मेला, गणित ओलंपियाड, खेल प्रतियोगिताओं आदि में भी हमारे छात्रों ने लगातार प्रथम स्थान प्राप्त किए हैं। विद्यालय से अखिल भारतीय स्तर तक आयोजित विज्ञान मेला, सांस्कृतिक कला पर्व, खेल, वैदिक गणित, कंप्यूटर विषयों के कार्यक्रमों से जहां गुणवत्ता, रुचि, नवाचार को बढ़ावा मिलता है वहीं राष्ट्रीय एकात्मता, परंपराओं का आदान-प्रदान तथा मिलजुल कर कार्य करने की भावना का विकास होता है। अभी तक प्राप्त सूचनाओं के आधार पर इस वर्ष UPSC परीक्षा में 27 से अधिक पूर्व छात्रों ने सफलता प्राप्त की है- प्रकाश यादव (प्रयागराज), विभोर सारस्वत (शिकारपुर, बुलंदशहर, यूपी) और ऋषभ चौधरी (गरोठ, मध्य प्रदेश) ने टॉप 50 में स्थान प्राप्त किया। यह सब प्रमाणित करता है कि जन साधारण की मूल्य आधारित शिक्षा भी वैश्विक मानकों से कहीं अधिक बेहतर परिणाम दे रही है।

विजन 2047 और पांच परिवर्तन

विद्या भारती का भावी रोड मैप पंच परिवर्तन के पाँच उद्देश्यों द्वारा निर्देशित है:

सामाजिक समरसता – जाति, वर्ग और क्षेत्रीय भेदभाव से ऊपर उठकर सामाजिक समरसता और एकता को बढ़ावा देना विद्या भारती का मुख्य उद्देश्य है। यह संगठन सभी सामाजिक वर्गों के लिए शिक्षा को सुलभ और समावेशी बनाने के लिए कार्य करता है। जनजाति, ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में कम शुल्क वाले विद्यालयों की स्थापना के माध्यम से यह सुनिश्चित किया गया कि कोई भी बच्चा आर्थिक या सामाजिक बधाओं के कारण शिक्षा से वंचित न रह जाए।

कुटुंब प्रबोधन- परिवार शिक्षा केन्द्र की एक इकाई है। उनके प्रबोधन से भारतीय परिवार को मूल्यों, भावनात्मक स्थिरता और नागरिक शिक्षा का केन्द्र बनाना आवश्यक है। विद्या भारती की भारतीय परंपराओं पर आधारित मूल्य – आधारित शिक्षा के माध्यम से यह संभव हो रहा है। शिशु वाटिका की गतिविधियाँ और मातृ-पितृ पूजन, अभिभावक संपर्क जैसे कार्यक्रम पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करते हैं और बच्चों में आदर, प्रेम व जिम्मेदारी की भावना पैदा करते हैं।

पर्यावरण संरक्षण – 2024 25 में ठोस परिणाम देखने को मिले: 5.2 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया, 1827 स्कूलों में जल संरक्षण के प्रयास हुए 3,939 स्कूलों में ऊर्जा बचत गतिविधियाँ चलाई गई और 2,790 स्कूलों में कचरा प्रबंधन अभियान चलाए गए। छात्रों और आचार्यों ने मिलकर 1,643 स्कूलों में इको- क्लब का नेतृत्व किया, 1,209 औषधीय बगीचे तैयार किये और 3,408 स्कूल परिसरों को हरित एवं पालीथीन मुक्त घोषित किया गया।

नागरिक कर्तव्य बोध- विद्यालयों की दैनंदिन गतिविधियों में अपने संवैधानिक कर्तव्यों को जीवन व्यवहार में लाने हेतु अभ्यास किया जाता है। नियमों का पालन, राष्ट्रीय मानबिन्दुओं का सम्मान, बड़े बुजुर्गों की सेवा, स्वच्छता, राष्ट्रीय संपत्ति का संरक्षण आदि यह सब गतिविधियां इस कार्य का आधार हैं।

स्व- भारतीय भाषाओं संस्कृति और लोग ज्ञान के माध्यम से आत्म -चेतना का विकास हमारे विद्यालयों की विशेषता है। संस्कृत शिक्षण और भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेश छात्रों को अपनी जड़ों से जोड़ता है। दूसरी ओर कौशल विकास केन्द्र, आई.टी.आई और जन शिक्षण संस्थान युवाओं को आत्मनिर्भरता की दिशा में व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदान करते हैं।

आत्म पहचान + कौशल विकास = आत्मनिर्भरता यह सूत्र विद्यार्थियों में उद्यमिता एवं चरित्र निर्माण का कार्य करता है।

नारी सम्मान – बालिकाओं और महिलाओं को समान अवसर, सम्मान और नेतृत्व की भूमिकाओं के साथ सशक्त बनाना विद्या भारती का एक प्रमुख लक्ष्य है।

कुल 34,75,757 विद्यार्थियों में से 14,41,601 बालिकाएँ हैं। परिवार में महिला की विशेष भूमिका को ध्यान में रखते हुए, विद्या भारती बालिका शिक्षा पर विशेष बल देती है। माँ- बेटी संवाद, किशोरी परामर्श और आत्मरक्षा प्रशिक्षण जैसे मंचों के माध्यम से संगठन भारतीय मूल्यों पर आधारित समग्र सशक्तिकरण को बढ़ावा देता है।

विद्या भारती विद्यार्थियों को ज्ञानवान, चरित्रवान, प्रखर राष्ट्रभक्त बनाने में सतत सक्रिय रहने के साथ ही देश की आपदा की किसी भी परिस्थिति में सहयोग के लिए तत्पर रहा है। विद्या भारती शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय पुनर्जागरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराती है। हम समाज के सभी वर्गों से आवाहन करते हैं कि वह इस प्रयास में सहभागी बनें, जिससे राष्ट्र की आवश्यकता अनुसार व्यक्तियों का निर्माण हो और राष्ट्र विकसित और आत्मनिर्भर बने।