Saturday, March 14, 2026
बस्ती

ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्टों की प्रामाणिकता पर उठ रहे सवाल,जारी हो रहे बिना हस्ताक्षर व मुहर के रिपोर्ट

ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर की रिपोर्टों की प्रामाणिकता पर उठ रहे सवाल, बिना हस्ताक्षर व मुहर के जारी हो रहे रिपोर्ट

नाम बड़े और दर्शन छोटे – ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर के रिपोर्ट पर तीन डॉक्टर के नाम, हस्ताक्षर एक का भी नहीं

बस्ती के एकमात्र संपूर्ण डायग्नोस्टिक सेंटर होने का दावा करने वाले ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर में बड़ा खेल

चुनिंदा मीडिया में दिए अपने बयानों में खुद ही फंस रहे ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक

बस्ती(मार्तण्ड प्रभात )।अप्रमाणित रिपोर्टों को लेकर जनपद में चर्चित ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर अब चर्चा का विषय बना हुआ है। जनपद मुख्यालय पर जिला अस्पताल के सामने गेट नंम्बर एक के दक्षिण कैली अस्पताल रोड पर ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर में अल्ट्रासांउड , एक्स रे , सीटी स्कैन, ईसीजी , सभी रोगों की जांच हेतु पैथालॉजी समेत अन्य तमाम सुविधाएं उपलब्ध हैं । जो अपने आपको बस्ती का एकमात्र संपूर्ण डायग्नोस्टिक सेंटर होने का दावा करता है।

रोजाना सैकड़ों की संख्या में मरीज डायग्नोस्टिक के लिए आते है और डायग्नोस्टिक सेंटरों में एक विश्वसनीय नाम माना जाता रहा है लेकिन वायरल रिपोर्ट कुछ अलग ही कहानी कह रही है।

भारीभरकम फीस के बाद भी नहीं मिल रहा सही रिपोर्ट

जिससे एक बार डायग्नोस्टिक सेंटर पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।भारीभरकम फीस लेने के बाद भी यदि सही रिपोर्ट मिले तो कोई कहा जाए।जिस तरह खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा कर रिपोर्ट जारी हो रहे है कही न कही विभाग की मिली भगत या दरियादिली दिखाई देती है।

नाम बड़े और दर्शन छोटे – ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर के रिपोर्ट पर तीन डॉक्टर के नाम, हस्ताक्षर एक का भी नहीं

वायरल रिपोर्ट में तीन-तीन डॉक्टरों के भारी भरकम नाम होने के बावजूद किसी भी डॉक्टर का हस्ताक्षर न होना रिपोर्ट की प्रमाणिकता पर सवाल खड़ा कर रहा है।

चुनिंदा मीडिया में दिए अपने बयानों में खुद ही फंस रहे ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालक

यह एकमात्र ऐसा मामला नहीं है ऐसे तमाम रिपोर्ट है जिन पर बिना हस्ताक्षर के जारी किया गया है । मीडिया को दिए अपने बयान में डॉक्टर ने ना ,ना करते हुए भी हस्ताक्षर न होने की बात स्वीकार भी कर रहे है। वायरल मीडिया बयानों में डॉक्टर ने भूल जाने या जल्दबाजी की वजह से हस्ताक्षर न करने की बात कर रहे है लेकिन यह बात गले से नहीं उतरता। एक मामला हो तो ठीक ऐसे तमाम रिपोर्ट उपलब्ध है।

एक तरफ जहां सेंटर संचालक जो कि डॉक्टर भी है हमेशा उपलब्ध रहने की बात कर रहे है वही दूसरी तरफ खुद ही रिपोर्ट पर हस्ताक्षर न होने की बात भी कहते है। ऐसे में पूरा डायग्नोस्टिक सिस्टम ही संदेह के घेरे में आ जाता है।

तमाम ऐसे रिपोर्ट है जहां हस्ताक्षर और मोहर नहीं लगी है। वही मीडिया में अपने बयानों में डॉक्टर गोलमोल जवाब दे कर संदेह प्रामाणिक कर रहे है। मरीजों के साथ इस तरह का खिलवाड़ चिंताजनक है। सूत्रों की माने तो डायग्नोस्टिक सेंटर द्वारा प्रदान की जा रही रिपोर्टों पर वास्तव में हस्ताक्षर व मुहर नहीं हो रहे हैं ।

इस मामले में सीएमओ ने गंभीरता दिखाते हुए जांचोपरांत दोषी पाए जाने पर उचित कार्यवाही की बात कही है।