
स्वास्थ्य समाचार
आपकी आँखें और बारिश का मौसम
बारिश के मौसम में अपनी आँखों का कैसे रखें ख्याल जाने नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉक्टर शरद श्रीवास्तव से
बदलता मौसम अपने साथ ठंडक और ताजगी के साथ यह नमी और आर्द्रता को भी बढ़ाता है, जिससे आंखों में संक्रमण का सीधा असर पड़ता है। इस मौसम में आंखों में जलन, लालिमा, खुजली और एलर्जी आम हो जाती हैं। हवा में फफूंद और बैक्टीरिया की वृद्धि बढ़ने के कारण कई लोगों को आंखों से पानी आना, धुंधली दृष्टि और आंखों में सूजन,आंखे लाल हो जाना जैसी समस्याएं भी होती हैं।

इसीलिए बरसात के मौसम में आंखों की देखभाल बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों, आईटी पेशेवरों,या कंप्यूटर या मोबाइल पर घंटों काम करने वाले, कॉन्टैक्ट लेंस उपयोगकर्ताओं और पहले से ही आंखों की समस्याओं से पीड़ित लोगों के लिए कुछ ज्यादा हो सतर्कता की आवश्यकता होती है।
आइए जानते हैं बरसात के मौसम में अपनी आंखों की देखभाल कैसे करें, इसके लिए कुछ सरल, व्यावहारिक और डॉक्टर शरद श्रीवास्तव द्वारा सुझाए गए सुझाव को अमल में लाना आवश्यक है।
बरसात के मौसम में आंखों की समस्याएं क्यों बढ़ जाती हैं?
मानसून के दौरान, आर्द्रता बहुत अधिक रहती है और हवा में धूल के कण, बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद के बीजाणु मौजूद होते हैं। ये आसानी से आंख के अंदर चले जाते हैं और संक्रमण का कारण बनते हैं।
बरसात के मौसम में आंखों की आम समस्याएं
- कंजंक्टिवाइटिस (“मद्रास आई”)
- आँखों का फ्लू
- एसी के उपयोग से आंखों में सूखापन
- एलर्जी और खुजली
- केराटाइटिस (कॉर्निया का संक्रमण)
- आँखों में फुंसी (आँखों पर फोड़े)
- आँखों में लालिमा और पानी आना
इनमें से अधिकांश स्थितियां स्पर्श के माध्यम से फैलती हैं – यानी किसी दूषित सतह को छूने के बाद अपनी आंखों को रगड़ने से भी संक्रमण हो सकता है।
आइए देखें कि किन छोटी-छोटी सावधानियों से आपकी आंखें स्वस्थ और संक्रमण मुक्त रह सकती हैं।
1. अपनी आँखों को छूने या रगड़ने से बचें।
संक्रमण फैलने के सबसे बड़े कारणों में से एक है गंदे हाथों से आंखों को छूना। नम मौसम में हाथों पर बैक्टीरिया की वृद्धि बढ़ जाती है, भले ही वे देखने में साफ लगें।
अपने हाथों को बार-बार धोएं ,अपनी आँखों को रगड़ने से बचें ,हाथों की जगह टिशू पेपर का इस्तेमाल करें
2. अपनी आँखों को साफ रखें
रोजाना आंखों की सफाई करने से हानिकारक कण दूर होते हैं और जलन कम होती है। इसलिए जरूरी है कि कम से कम एक बात आँखों को साफ पानी से धोएँ।
3. कॉन्टैक्ट लेंस की जगह चश्मा पहनें
कॉन्टैक्ट लेंस नमी को अंदर फंसा लेते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ा देते हैं। मानसून के दौरान लेंस का उपयोग कम करने का प्रयास करें।
बेहतर विकल्प:
चश्मा पहनें
एक बार इस्तेमाल होने वाले डिस्पोजेबल लेंस का उपयोग करें
कॉन्टैक्ट लेंस बॉक्स को नियमित रूप से साफ करें
4. विटामिन ए और ओमेगा-3 की मात्रा बढ़ाएं।
बेहतर पोषण आपकी आंखों की सतह को स्वस्थ रखता है और जलन को कम करता है।
आहार में करे परिवर्तन,
आहार में परिवर्तन कर भी आँखो को स्वास्थ्य रख सकते है। इसके लिए भोजन में नियमित रूप से गाजर, पालक,कद्दू,हरी पत्तेदार सब्जियां, बादाम,अखरोट,जो मांसाहारी है वो मछली और अंडे का भी इस्तेमाल कर सकते है।
5. दूसरों के तौलिये या तकिए का इस्तेमाल करने से बचें
बरसात के महीनों में व्यक्तिगत वस्तुओं को साझा करने से संक्रमण तेजी से फैलता है।
- अपना तौलिया इस्तेमाल करें
- अपने तकिए को साफ रखें
चादरें नियमित रूप से बदलें
6. स्वयं दवा लेने से बचें
आँखों के अधिकांश संक्रमणों के लिए उचित चिकित्सा जांच आवश्यक है। अनियमित रूप से ड्रॉप्स डालने से लक्षण और बिगड़ सकते हैं।
कभी भी उपयोग न करें:
- बिना डॉक्टर के पर्चे के मिलने वाली स्टेरॉयड आई ड्रॉप्स
- किसी और की आंखों की दवाइयां
- एक्सपायर्ड आई ड्रॉप्स
ऐसे संकेत जिनसे आपको तुरंत नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए
डॉक्टर शरद बताते है कि यदि आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण दिखाई दे, तो घरेलू उपचारों का इंतजार न करें:
- लगातार लालिमा
- आँख का दर्द
- चिपचिपा स्राव
- सूजन
- दृष्टि धुंधली
- प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता
डॉक्टर शरद बताते है कि यदि कोई लक्षण या समस्या 48 घंटे से अधिक समय से हो तो तुरंत किसी योग्य चिकित्सक से संपर्क करे। साथ ही बिना चिकित्सक के परामर्श के कोई भी दवा या ड्रॉप का इस्तेमाल बिल्कुल न करे।
बरसात के मौसम में बच्चों की आंखों की देखभाल
डॉक्टर साहब बताते है कि बच्चे अक्सर अपनी आंखों को छूते हैं और बाहर खेलते हैं, इसलिए संक्रमण आसानी से फैलता है। इसलिए बच्चों की स्वक्षता का पूरा ध्यान रखे और गंभीर संक्रमण के दौरान सामाजिक संपर्क से दूर रहे।
अगर घर में किसी को कंजंक्टिवाइटिस हो जाए तो उसका तौलिया अलग रखे, आँखों से नज़दीकी संपर्क से बचें, नियमित रूप से तकिए और तौलिया धुलते रहे।
बरसात का मौसम ताजगी भरा होता है, लेकिन इससे आंखों में संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। कुछ आसान सावधानियों और अच्छी स्वच्छता से मानसून से जुड़ी आंखों की अधिकांश समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है।
लालिमा, दर्द, स्राव या दृष्टि में बदलाव को कभी भी नज़रअंदाज़ न करें। समय पर इलाज कराने से आपकी आंखों की रोशनी सुरक्षित रहती है और जटिलताओं से बचाव होता है।
यदि आपको या आपके परिवार को मानसून के दौरान आंखों में लालिमा, जलन, आंखों में फ्लू के लक्षण या बार-बार एलर्जी का अनुभव होता है, तो घरेलू उपचार आजमाने के बजाय आंखों की उचित जांच करवाना सबसे अच्छा है।
डॉक्टर शरद श्रीवास्तव भानपुर में नियो मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल का संचालन करते है। जहां नेत्र रोग के उपचार के लिए विशेष सुविधा उपलब्ध है।






