पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने और मारपीट की धमकी देने का आरोप, संजय कुमार पाठक ने लगाई न्याय की गुहार

पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने और मारपीट की धमकी देने का आरोप,

संजय कुमार पाठक ने लगाई न्याय की गुहार

संतकबीरनगर(मार्तण्ड प्रभात )। जनपद संतकबीरनगर के बखिरा थाना क्षेत्र के परसुडीह गांव निवासी संजय कुमार पाठक पुत्र लक्ष्मीकांत पाठक ने अपने कुछ पट्टीदारों पर पुश्तैनी जमीन से बेदखल करने, जमीन पर कब्जा करने तथा वहां जाने पर मारपीट की धमकी देने का आरोप लगाया है। संजय कुमार पाठक ने मीडिया के सामने अपनी समस्या रखते हुए प्रशासन से न्याय दिलाने की मांग की है।

संजय कुमार पाठक का कहना है कि जमीन पर 1960 से उनका और उनके परिवार का कब्जा रहा है।

उनके मुताबिक, वर्तमान में उनके कुछ पट्टीदार उक्त जमीन से उन्हें हटाकर उस पर कब्जा करना चाहते हैं। इस विवाद को लेकर कई बार आपसी बातचीत की गई और थाने में भी शिकायत दी गई, लेकिन समाधान नहीं निकलने पर उन्होंने उपजिलाधिकारी से शिकायत की।

संजय कुमार पाठक के अनुसार, उपजिलाधिकारी के निर्देश पर राजस्व विभाग के लेखपाल और कानूनगो ने पुलिस बल की मौजूदगी में मौके पर पहुंचकर उनकी तथा उनके पट्टीदारों की जमीन की पैमाइश कर सीमांकन किया था। उनका कहना है कि सीमांकन के बाद उन्होंने अपनी जमीन पर टीनशेड रखने की योजना बनाई।

टीन शेड रखने के दौरान मारपीट का आरोप

संजय कुमार पाठक ने आरोप लगाया कि पुलिस के मौके से जाने के बाद जब वह अपनी जमीन पर टीनशेड रख रहे थे, तभी उनके पट्टीदार पक्ष की कुछ महिलाओं ने उन पर हमला कर दिया। उनके मुताबिक, अचानक चोट लगने के कारण वह बेहोश हो गए। बाद में परिवार के सदस्य मौके पर पहुंचे, जिसके बाद उन्हें होश आया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जमीन के विवाद में उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है और अपनी ही जमीन पर कब्जा बनाए रखने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

संजय कुमार पाठक का दावा है कि राजस्व विभाग द्वारा पैमाइश और सीमांकन किए जाने के बावजूद विवाद समाप्त नहीं हुआ है।

प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

संजय कुमार पाठक ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जमीन से संबंधित अभिलेखों और सीमांकन की रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई करने तथा उन्हें सुरक्षा एवं न्याय दिलाने की मांग की है।

फिलहाल, इस मामले में दूसरे पक्ष का बयान और पुलिस का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हुई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित राजस्व अभिलेखों, सीमांकन रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।