नरहरपुर में 195 मजदूरों की फर्जी हाजिरी के आरोप से सनसनी

कप्तानगंज, बस्ती(विजय)। विकासखंड कप्तानगंज के ग्राम पंचायत नरहरपुर में मनरेगा कार्यों को लेकर एक गंभीर अनियमितता का मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय प्रशासन और व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक रोजगार सेवक, जो खुद को पत्रकार भी बताता है, पत्रकारिता की आड़ में फर्जी हाजिरी लगवाकर सरकारी धन के दुरुपयोग में जुटा हुआ है।
ग्रामीणों के अनुसार, संबंधित रोजगार सेवक ने पत्रकारिता का चोला ओढ़कर अपना प्रभाव क्षेत्र में मजबूत किया और उसी का फायदा उठाते हुए मनरेगा कार्यों में मनमानी शुरू कर दी। आरोप है कि कागजों में मजदूरों की संख्या बढ़ाकर ऑनलाइन मस्टर रोल तैयार किए गए, जबकि धरातल पर उतने मजदूर काम करते नजर नहीं आए। इससे साफ संकेत मिल रहा है कि कहीं न कहीं फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी धन की निकासी की जा रही है।
मामले में ग्राम पंचायत के सचिव की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। लगातार उठ रहे आरोपों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बावजूद सचिव की चुप्पी लोगों को खटक रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते सक्रिय होते, तो शायद स्थिति इतनी गंभीर न होती।
सूत्रों की मानें तो ग्राम प्रधान, सचिव और कथित पत्रकार-रोजगार सेवक के बीच आपसी सांठगांठ से यह पूरा खेल संचालित हो रहा है। आरोप यह भी है कि पक्ष विशेष में खबरें प्रकाशित कराकर अपनी छवि को बेहतर दिखाने और वास्तविक स्थिति को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे आम जनता गुमराह हो रही है।
सबसे अहम सवाल उन 194 मजदूरों को लेकर खड़ा हो रहा है, जिनके नाम पर मस्टर रोल जारी किया गया है। क्या इन मजदूरों की उपस्थिति के प्रमाण स्वरूप फोटो और डिमांड फॉर्म पर वास्तविक हस्ताक्षर मौजूद हैं, या यह पूरा मामला सिर्फ कागजों तक सीमित है—यह अब जांच का विषय बन गया है।
ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पटल पर अपलोड किए गए फोटो और दस्तावेजों की निष्पक्ष व तकनीकी जांच उच्च अधिकारियों द्वारा कराई जाए, तो इस पूरे प्रकरण का बड़ा खुलासा हो सकता है। जांच के बाद दोषी पाए जाने पर संबंधित लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई और जेल तक की नौबत भी आ सकती है।
नरहरपुर का यह मामला अब पूरे कप्तानगंज ब्लॉक से लेकर जिले में चर्चा का विषय बन चुका है। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे मामलों पर समय रहते लगाम नहीं लगाई गई, तो अन्य ग्राम पंचायतों में भी मनरेगा योजनाओं के नाम पर इसी तरह का भ्रष्टाचार पनपता रहेगा।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।







