Tuesday, July 7, 2026
बस्ती

एथेनॉल प्लांट पर फैलाए जा रहे भ्रम का कंपनी ने किया खंडन, कहा- सभी मंजूरियां लेकर हो रहा निर्माण

एथेनॉल प्लांट पर फैलाए जा रहे भ्रम का अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड ने किया खंडन,

कहा- सभी मंजूरियां लेकर हो रहा निर्माण

दसिया में 75% पूरा हो चुका है संयंत्र;

जीरो लिक्विड डिस्चार्ज तकनीक अपनाने और 1000 लोगों को रोजगार देने का दावा

बस्ती(7 जुलाई)। रुधौली विधानसभा क्षेत्र के दसिया में स्थापित की जा रही अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड की एथेनॉल फैक्ट्री को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे विरोध और भ्रामक दावों के बीच कंपनी प्रबंधन सामने आया। सोमवार को स्टेशन रोड स्थित होटल बालाजी प्रकाश में आयोजित प्रेस वार्ता में कंपनी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि परियोजना पूरी तरह वैधानिक प्रक्रिया के तहत संचालित की जा रही है और पर्यावरण संबंधी सभी आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त हैं।

कंपनी के डायरेक्टर रोहन जायसवाल ने बताया कि वर्ष 2021 से अब तक किसानों से भूमि की खरीद पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है। सभी रजिस्ट्रियां अनीता डिस्टलरी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से हुई हैं तथा भुगतान पहले किसानों के बैंक खातों में किया गया। उन्होंने कहा कि शुरुआत से ही स्पष्ट था कि यहां एथेनॉल उत्पादन इकाई स्थापित की जाएगी, इसलिए ग्रामीणों को जानकारी नहीं होने का दावा तथ्यहीन है।

कंपनी के प्रोपराइटर सुधीर जायसवाल ने बताया कि सीमा दीवार निर्माण शुरू होने से पहले मुख्य राजस्व अधिकारी की मौजूदगी में किसानों के साथ लोक सुनवाई भी कराई गई थी। सर्वसम्मति के बाद ही निर्माण कार्य शुरू हुआ और वर्तमान में संयंत्र का लगभग 75 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है।

यूनिट हेड पी.एन. दूबे ने पर्यावरण संबंधी आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि संयंत्र जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) तकनीक पर आधारित होगा। फैक्ट्री से किसी भी प्रकार का दूषित पानी बाहर नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उसका शोधन कर दोबारा उत्पादन प्रक्रिया में ही उपयोग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि परियोजना को पर्यावरण मंत्रालय और उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित सभी संबंधित विभागों से आवश्यक स्वीकृतियां मिल चुकी हैं।

चीफ कंसल्टेंट पी.एन. पांडेय ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे उन दावों को भी गलत बताया, जिनमें कहा जा रहा है कि एक लीटर एथेनॉल बनाने में 10 हजार लीटर पानी खर्च होता है या एथेनॉल प्लांट बड़े स्तर पर प्रदूषण फैलाते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की ओर से भी तथ्यात्मक स्पष्टीकरण जारी किए जा चुके हैं। लोगों से अपील की गई कि किसी भी वायरल पोस्ट पर विश्वास करने से पहले उसके आधिकारिक स्रोत की जांच अवश्य करें।

कंपनी प्रबंधन के अनुसार संयंत्र में किसानों से धान, मक्का और टूटे चावल की खरीद कर एथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से करीब 1000 लोगों को रोजगार उपलब्ध होगा।

प्रबंधन ने कहा कि कंपनी पर्यावरण संरक्षण के सभी मानकों का पालन करते हुए किसानों की आय बढ़ाने, स्थानीय युवाओं को रोजगार देने और बस्ती के औद्योगिक विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही परियोजना के संचालन में पूरी पारदर्शिता और जनसहभागिता बनाए रखने का भरोसा भी दिया।