Saturday, August 1, 2026
बस्ती

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन, साहित्यकारों ने बांधा समां

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन, साहित्यकारों ने बांधा समां

बस्ती। उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर साहित्यिक संस्था अवधी संगम के तत्वावधान में जिला पंचायत परिसर में कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयोजन दीपक सिंह ‘प्रेमी’ ने किया। इस अवसर पर कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, साहित्य,प्रेम,व्यंग्य और समकालीन विषयों पर प्रभावशाली प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. वी.के. वर्मा ने कहा कि कवि और शायर सदैव समाज को नई दिशा और प्रेरणा देते रहे हैं। उन्होंने अपनी पंक्तियां “होरी का तो आज भी है प्रतिकूल नक्षत्र, प्रेमचंद के पात्र हैं, यत्र, तत्र, सर्वत्र” सुनाकर प्रेमचंद के साहित्य की वर्तमान समय में प्रासंगिकता को रेखांकित किया, जिस पर उपस्थित श्रोताओं ने जोरदार तालियों से उनका स्वागत किया।

कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने की, जबकि संचालन डॉ. अफजल हुसैन ‘अफजल’ ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ अर्चना श्रीवास्तव द्वारा सरस्वती वंदना तथा सलीम वस्तवी ‘अजीजी’ की नात-ए-पाक से हुआ।

मुशायरे में विनोद उपाध्याय ‘हर्षित’ ने अपनी चर्चित शायरी “हर तरफ शोर मचा रखा है, तौबा-तौबा, एक जालिम ने डरा रखा है, तौबा-तौबा” प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। वहीं डॉ. त्रिभुवन प्रसाद मिश्र ने “मैंने सेवा व्रत अपनाया, परम आत्मिक सुख है पाया” के माध्यम से सेवा और मानवीय मूल्यों का संदेश दिया।

शायर शाद अहमद ‘शाद’ ने अपनी गजल के जरिए समसामयिक परिस्थितियों पर कटाक्ष किया, जबकि डॉ. अफजल हुसैन ‘अफजल’ ने “आज शब चांद मेरे घर में ठहर जाने दो,अपनी जुल्फों के तले रात गुजर जाने दो” सुनाकर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। संयोजक दीपक सिंह ‘प्रेमी’ ने “नजर का फिर निशाना हो गया है,ऐ दिल फिर से दीवाना हो गया है” प्रस्तुत कर सराहना प्राप्त की।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ ने अपनी व्यंग्यात्मक रचना “पहुँचाई है देश को तुमने कितनी हानि, गाली खाकर भी नहीं होती तुमको ग्लानि” सुनाकर वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा प्रहार किया।

कार्यक्रम में काजी अनवार पारसा, सलीम वस्तवी ‘अजीजी’, सागर गोरखपुरी,डॉ.राजेन्द्र सिंह, सुशील सिंह ‘पथिक’, राहुल सिंह चौहान तथा अर्चना श्रीवास्तव सहित अनेक कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। कार्यक्रम में श्याम प्रकाश शर्मा,बटुकनाथ शुक्ल, ओम प्रकाश धर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में मुंशी प्रेमचंद की साहित्यिक विरासत, हिंदी-उर्दू की साझा संस्कृति और सामाजिक सरोकारों की सशक्त अभिव्यक्ति देखने को मिली।