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पुण्य तिथि पर याद किये गये स्वामी विवेकानन्द

बस्ती (मार्तण्ड प्रभात)। भारतीय संस्कृति और अध्यात्म का डंका बजाने वाले स्वामी विवेकानंद को उनके 121 वीं पुण्य तिथि पर याद किया गया। प्रेम चन्द साहित्य एवं जन कल्याण संस्थान अध्यक्ष सत्येन्द्रनाथ मतवाला के संयोजन में मंगलवार को कलेक्टेªट परिसर में आयोजित कार्यक्रम को मुख्य अतिथि के रूप में सम्बोधित करते हुये वरिष्ठ चिकित्सक और साहित्यकार डा. वी.के. वर्मा ने कहा कि 39 वर्ष के संक्षिप्त जीवन में स्वामी विवेकानन्द जो काम कर गए।

वे आने वाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने 1893 में अमरीका के शिकागो, विश्व धर्म सम्मेलन में भारत की ओर से हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और उसे सार्वभौमिक पहचान दिलवाई। उनका योगदान सदैव याद किया जायेगा।

विशिष्ट अतिथि श्याम प्रकाश शर्मा और वी.के. मिश्र ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन पर प्रकाश डालते हुये कहा कि अपने विचारों से लोगों की जिंदगी को रोशन करने वाले स्वामी विवेकानंद भारत के महान पुरुषों में से एक है। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 में और मृत्यु 4 जुलाई 1902 में हुई थी। वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद बेहद साधारण जीवन जीते थे। उनके महान विचार सभी के लिए प्रेरणास्रोत है।

अध्यक्षता करते हुये वरिष्ठ साहित्यकार सत्येन्द्रनाथ मतवाला ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि वरिष्ठ कवि डा. रामकृष्ण लाल ‘जगमग’ स्वामी विवेकानन्द पर महाकाव्य की रचना कर रहे हैं, संयोग ही है कि 4 जुलाई को उनका जन्म दिन है। निश्चित रूप से डा. जगमग का महाकाव्य नयी पीढी को विवेकानन्द से परिचित करायेगा। कहा कि स्वामी विवेकानन्द ने कहा था कि ब्रह्माण्ड की सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं, वो हम ही हैं। जब तक आप खुद पर विश्वास नहीं करते तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते। उनके विचार युगो तक प्रासंगिक रहेंगे।

पुण्य तिथि पर स्वामी विवेकानन्द को नमन् करने वालों में सुशील सिंह पथिक, पं. चन्द्रबली मिश्र, पेशकार मिश्र, ओम प्रकाश धर द्विवेदी, राघवेन्द्र शुक्ल, राहुल यादव, आचार्य छोटेलाल, रामधीरज सिंह, कमलेश कुमार चौधरी, अमित सिंह, दुर्गेश नन्दन श्रीवास्तव, अनूप पाण्डेय, ज्योति उपाध्याय, दीनबंधु उपाध्याय, शैलेन्द्र कुमार, राम उजागिर, मिथलेश शुक्ल, कृष्णचन्द्र पाण्डेय, दीनानाथ यादव आदि शामिल रहे।

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