अदभुत फल देने वाला है श्रवण मास के पुरुषोत्तम मास का फल - www.martandprabhat.com
मार्तण्ड प्रभात न्यूज में आपका स्वागत है। अपना विज्ञापन/खबर प्रकाशित करवाने के लिए वाट्सएप करे - 7905339290। आवश्यकता है जिला वा ब्लॉक स्तर पर संवाददाता की संपर्क करें -9415477964

अदभुत फल देने वाला है श्रवण मास के पुरुषोत्तम मास का फल

संस्कृति और धर्म । इस साल 2023 में अधिक मास के लिए अद्भुत संयोग बन रहा है। हर तीन वर्ष में आने वाला अधिकमास इस बार 19 वर्ष बाद श्रावण में है। इससे पहले 2004 में श्रावण अधिकमास था। पिछले साल रक्षा बंधन 11 अगस्त को था, लेकिन इस साल 2023 में यह पर्व 30 अगस्त को है यानी इस बार पूरे 19 दिन का अंतर है।

ऐसा ही अंतर इसके बाद आने वाले त्योहारों जैसे जन्माष्टमी, गणेश उत्सव, श्राद्ध पक्ष, नवरात्रि, दशहरा और दीपावली में भी देखने को मिलेगा। इन सभी त्योहारों में भी लगभग इतने ही दिनों का अंतर आएगा

क्या है और क्यों होता है अधिक मास

भारत में दो तरह के कैलेण्डर चलते हैं। एक सूर्य गणना के अनुसार जिसमें जनवरी से दिसम्बर तक के 12 महीने होते हैं और दूसरा चन्द्र गणना के अनुसार जिसमें चैत्र से फाल्गुन तक के 12 महीने होते हैं। इसे हम पंचाग से देखते हैं। व्रत-त्योहार चन्द्रमास की गणना के अनुसार मनाए जाते हैं।

जिसमें चैत्र से फाल्गुन तक के 12 महीने होते हैं। सूर्य गणना से वर्ष के 365 दिन होते हैं, जबकि चन्द्र गणना का वर्ष 354 दिन का होता है। इस प्रकार हर साल सूर्य व चन्द्र गणना से 11 दिन का अंतर हो जाता है। यह अंतर तीन साल में 33 दिन का हो जाता है तब अधिक मास बन जाता है।

इस बार श्रावण में अधिक मास है इसलिए श्रावण मास इस बार 4 जुलाई से 31 अगस्त तक है और इसमें 18 जुलाई से 16 अगस्त तक का समय अधिक मास का होगा। अधिक मास को मळ मास और पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है।

अधिक मास में वर्जित कार्य 

अधिकमास में नामकरण, यज्ञोपवीत संस्कार, विवाह, गृह प्रवेश, सगाई, कर्णवेध, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिए. अधिक मास में शुभ और मांगलिक कार्यों को करने से भौतिक और भावनात्मक सुखों में कमी आती है।

विधिवत सेवते यस्तु पुरुषोत्तममादरात। कुलं स्वकीयमुद्धृत्य मामेवैष्यत्यसंशयम।। 

यानी पुरुषोत्तम मास में जो व्यक्ति व्रत, उपवास, पूजा, दान आदि शुभ कर्म करता है। वह अपने पूरे परिवार के साथ भगवान श्रीकृष्ण की कृपा प्राप्त करता है। इस अवधि में व्रत रखकर संयम और नियमों का पालन करें।

सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करके गायत्री मंत्र का जाप करें। सूर्योदय के समय सूर्यदेव को अघ्र्य दें। रामायण, श्रीमद् भागवत कथा, शिव पुराण या देवी पुराण आदि इस अवधि में घर में पढ़ने और परिवार के बीच बैठकर सुनने से भी धन-धान्य व जीवन में उन्नति का मार्ग खुलता है।

क्या करे पुरुषोत्तममास में

1- धर्म कर्म के कार्यों के लिए अधिकमास बेहद उपयोगी माना गया है। इस मास में भगवान कृष्ण और नरसिंह भगवान की कथाओं को सुनना चाहिए। दान पुण्य के कार्य करने चाहिए। अधिकमास में श्रीमद्भगवद्गीता, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ, राम कथा और गीता का अध्याय करना चाहिए। सुबह शाम ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का 108 बार जप करना चाहिए।

2- अधिकमास में जप तप के अलावा भोजन का भी ध्यान रखना चाहिए। इस पूरे मास में एक समय ही भोजन करना चाहिए। इस मास में चावल, जौ, तिल, केला, दूध, दही, जीरा, सेंधा नमक, ककड़ी, गेहूं, बथुआ, मटर, पान सुपारी, कटहल, मेथी आदि चीजों के सेवन का विधान है। इस मास में ब्राह्मण, गरीब व जरूरतमंद को भोजन करना चाहिए और दान करना चाहिए।

3- अधिकमास में दीपदान करने का विशेष महत्व है। साथ ही इस माह एक बार ध्वजा दान भी अवश्य करना चाहिए। इस अवधि में दान पुण्य के कार्य करना, सामाजिक व धार्मिक कार्य, साझेदारी के कार्य, वृक्ष लगाना, सेवा कार्य, मुकदमा लगाना आदि कार्यों में कोई दोष नहीं होता है।

4- अधिकमास में विवाह तय कर सकते हैं और सगाई भी कर सकते हैं। भूमि व मकान खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट कर सकते हैं। साथ ही आप शुभ योग व मुहूर्त में खरीदारी भी कर सकते हैं। इसके अलावा आप संतान के जन्म संबंधी कार्य कर सकते हैं, सीमांत, शल्य कार्य आदि कार्य भी कर सकते हैं।

मलमास में क्या ना करें

1- अधिकमास या मलमास में मांस-मछली, शहद, मसूर दाल और उड़द दाल, मूली, प्याज-लहसुन, नशीले पदार्थ, बासी अन्न, राई आदि चीजों का सेवन करने से नही करना चाहिए।

2- इस माह नामकरण, श्राद्ध, तिलक, मुंडन, कर्णछेदन, गृह प्रवेश, संन्यास, यज्ञ, दीक्षा लेना, देव प्रतिष्ठा, विवाह आदि शुभ व मांगलिक कार्यों को करना वर्जित है।

3- अधिकमास में घर, मकान, दुकान, वाहन, वस्त्र आदि की खरीदारी नहीं करना चाहिए। हालांकि शुभ मुहूर्त निकलवाकर आभूषण खरीद सकते हैं।

4- अधिकमास में शारीरिक और मानसिक रूप से किसी का अहित नहीं करना चाहिए। इस माह अपशब्द, क्रोध, गलत कार्य करना, चोरी, असत्य बोलना, गृहकलह आदि चीजें नहीं करना चाहिए। साथ ही तालाब, बोरिंग, कुआं आदि का त्याग करना चाहिए।

error: Content is protected !!
×